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अभिभाषण

भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द जी का महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

वडोदरा : 22.01.2018
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भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द जी का महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के

1.इस दीक्षांत समारो हमें उपस्थित सभी पदकविजेताओं, उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों,अन्य सभी विद्यार्थियोंतथा अभिभावकों को मेरीबहुत -बहुत बधाई!

2.इस विश्वविद्यालय की कुलाधिपति,श्रीमती शुभांगिनीदेवी राजेगाय कवाड जी के प्रगतिशील विचारों और योगदान से मैं परिचित हूं। जब उन्होने मुझसे यहां आने के लिए समय निकालने का आग्रह किया,तो मुझे यहां आना ही था। यहां आकर, और विश्वविद्यालय के उत्साही विद्यार्थियों को सामने देखकर मैं बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं।

3.इस विश्वविद्यालय के विजिटर, गुजरात के राज्यपाल, कोहली जी एक अनुभवी और श्रेष्ठ शिक्षाविद भी हैं। उन्होने शिक्षा जगत को निरंतर योगदान दिया है। उनका मार्ग-निर्देशन मिलना इस विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य का विषय है।

4.गुजरात में, राज्य सरकार के प्रयासों के अच्छे परिणाम,इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा आधुनिक सुविधाओं के रूप में दिखाई देते हैं;और विकास के प्रति उत्साह का माहौल भी नज़र आता है। इसके लिए मैं मुख्य मंत्री श्री विजय रूपाणी जी और राज्य सरकार की उनकी टीम की सराहना करता हूं।

5.वडोदरा शहर को ‘संस्कारी नगरी’ कहा जाता है यह गुजरात की ‘सांस्कृतिक राजधानी’ के रूप में प्रसिद्ध है। इस विश्वविद्यालय का आदर्श-वाक्य, "सत्यम शिवम सुंदरम” भी संस्कार और संस्कृति, दोनों से जुड़ा हुआ है।

6.मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से , और विदेशों से भी अनेक छात्र आते हैं।भारत के पश्चिमी भाग में स्थित इस विश्वविद्यालय में, सुदूर उत्तर-पूर्व के राज्यों से, विद्यार्थी आया करते हैं। विश्वविद्यालय का एक एक्सचेंज-प्रोग्राम भी है जिसके तहत यूरोप के विभिन्न देशों में शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाती है।

7.मुझे यह जानकर भी खुशी हुई है कि इस विश्वविद्यालय में साइन्स और आर्ट्स, दोनों ही क्षेत्रों के विभागों में अध्ययन और अध्यापन का बहुत अच्छा वातावरण है। सभी विभागों के विद्यार्थी, यहां से शिक्षा ले कर निकलने के बाद, अलग-अलग क्षेत्रों में , सफलता के उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

8.महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने इस क्षेत्र में अच्छे स्तर की उच्च-शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना की थी|लोक कल्याणकारी तथा शारीरिक, मानसिक और नैतिक शक्ति को बढ़ाने वाली शिक्षा का प्रसार करना उनका उद्देश्य था। यह विश्वविद्यालय उनके सपनों का साकार रूप है। वे श्री औरोबिन्दो और बाबा साहेब डॉक्टर आंबेडकर जैसी विभूतियों को इस विश्वविद्यालय में ले आए थे। जैसा कि सभी जानते हैं कि बाबासाहेब को छात्रवृत्ति देकर विदेश भेजना सयाजीराव की पारखी दृष्टि और उदारता का परिणाम था।डॉक्टर आंबेडकर के राष्ट्रव्यापी व्यक्तित्व को बनाने में यदि सबसे अधिक श्रेय किसी को जाता है तो यहां के गायकवाड़ परिवार को ही जाता है।

9.सयाजीराव ने, वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली लोगों को, एक ऐसे समय में सहयोग और प्रोत्साहन दिया था,जब ऐसा सहयोग करने वाले नहीं के बराबर थे। मैं इस विश्वविद्यालय द्वारा, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए, ‘फ़ेलोशिप’ शुरू किये जाने की सराहना करता हूं यहां के छात्रों द्वारा, समाज के वंचित और शोषित लोगों के विकास में योगदान देना, सयाजीराव के आदर्शों के अनुरूप होगा।

10. नॉलेज सोसाइटी से आगे बढ़ते हुए अबइनोवेशन सोसाइटी के निर्माण पर ज़ोर दिया जा रहा है। सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ती हुई आबादी और प्रकृति विरोधी पद्धतियों का दबाव है। विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए छोटे और बड़े स्तरों पर इनोवेटिव समाधान निकालने होंगे। ऐसे समाधानों की तलाश करना अपने आप में इनोवेशन का बहुत बड़ा क्षेत्र है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स का प्रयोग बढ़ रहा है, जिसके कारण अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकते हैं। ऐसे परिवर्तनों से तालमेल बनाते हुए आगे बढ़ने के लिए, नयी सोच और नए तरीकों की जरूरत होगी।

प्यारे विद्यार्थियों

11.आज का दीक्षांत समारोह आप सब के व्यावहारिक जीवन की शुरुआत है। अब आप जीवन की पाठशाला में प्रवेश करने जा रहे हैं। वहां चुनौतियां और अवसर, दोनों ही आपका इंतज़ार कर रहे हैं। आप सभी में सफलता की अपार संभावनाएं हैं|आपने अब तक जो शिक्षा प्राप्त की है, उसे अपने विकास, और समाज के विकास के लिए उपयोग में लाने का समय आ गया है।

12.आप सब में कोई-न-कोई ऐसी विशेष प्रतिभा है , ऐसी खासियत है जो आपकी पहचान बन सकती है। एकाग्रता, निष्ठा और ईमानदारी आपके विकास में सहायक सिद्ध होगी।

13. आज स्वर्ण पदक विजेताओं में बेटों की संख्या 92 और बेटियों की संख्या 171 है। कल गुजरात विश्वविद्यालय में भी बेटों और बेटियों के बीच ऐसा ही अनुपात देखने को मिला। यह गुजरात के समाज के लिए और पूरे देश के लिए खुशी की बात है। यह हमारे समाज के निरंतर प्रगतिशील होने का संकेत है। मैं बालिकाओं और महिलाओं के हित में गुजरात सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा करना चाहूंगा। केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण सफलता प्राप्त करने वाली लगभग 100 महिलाओं को सम्मानित किया है। उन महिलाओं का अभिनंदन करने के लिए, दो दिन पहले, राष्ट्रपति भवन में एक समारोह का आयोजन किया गया। उन महिलाओं की सफलता सभी बेटियों के लिए प्रेरणा-स्रोत है। आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली इन बेटियों को मेरी सलाह है कि वे भविष्य में भी, पूरे आत्म-विश्वास के साथ अपनी प्रतिभा और हुनर को निखारें, और राष्ट्र की सेवा में जुट जाएँ।

14.मैं आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को,एक बार फिर बधाई देता हूं। जिन छात्र-छात्राओं ने आज पदक प्राप्त किए हैं, उनकी लगन और मेहनत की मैं विशेष सराहना करता हूं। मैं यहां उपस्थित आप सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।

15.अंत में, मैं आप सब कोराष्ट्रपति भवन में आने और उसे देखने का आमंत्रण देता हूं। हमारे लोकतन्त्र का प्रतीकराष्ट्रपति भवन आप सब का ही भवन है। राष्ट्रपति भवन में आप सभी का स्वागत है।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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